ऐ ख़ुदा ! 
टीस जख्मों की, 
बर्दास्त करूँ तो मगर,
दिल कि दीवारो पे, 
तेरे नाम के सिवा,
निशाँ कोई मंजूर नही । 


यूँ  अब दवा तो,
जीने का एक बहाना हो गई है । 
मेरे मरने का फाँसला भी अब,
तेरे कदमो की आहट का,
तलबगार हो गया है ।।

                                               सुशील 

O God!
twinge of injuries,
I should tolerate but,
on the walls of heart,
there is your name,
no space for any emotions
except to your love,

I know
The dose of drugs just like,
has a reason to live.
the distance of my death
is just waiting
the sound of your feet

sushil