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Category: My Collections

school education
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School Education: स्कूली शिक्षा का महत्व और प्रभाव 

School Education जीवन में स्कूली शिक्षा (school education) का महत्व और प्रभाव दीर्गगामी होता है। एक बच्चा पारिवारिक परिवेश से समाज में विलेयता की ओर स्वंयम और समाज के उत्थान की ओर एक कदम बढ़ाता है। पारिवारिक संस्कारो से युक्त होकर देश और समाज की…

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Relationship- रिश्तो में पडी दरार 

 कुछ रिश्ते (Relation) अधूरे थे शायद,वर्ना , कभी ऐसा तो नहीं था, हमारे-तुम्हारे बीच के फाँसले, यूँ ही बढ़ गए ho।  विरुद्ध हो गया हूँ , कई बार, स्वयं की विचार धाराओ से, संभवतय कठिन होगा,  इस बार , बाँध की अकस्मात टूटी दीवारो से,…

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समय की विवशता 

इस राह से गुजरती है बहुत सी बसे , कारे और दुसरे वहान कितना मुशकिल है छोटी सी दूरी तय कर पाना उसके लिए घंटो बीत जाते हैं इंतजार में और यूँ ही जीवन कौन रुकेगा उसके लिए और क्यों सभी को अपना सफर तय…

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प्रथम नवरात्रि पूजन और मेरा बेसन का हलुआ 

सर्व प्रथम नवरात्रे पर्व पूजन की आपको बहुत- बहुत शुभकामनायेँ ! गृह स्वामिनी के व्रत अनुरोध को नकारते हुए विद्रोह का स्वर अति उन्मुख करते हुए हमने कह दिया की आज व्रत रख पाना संभव नहीं है। आँखों में दया, प्रेम और संकुचाहट के भाव…

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वो एक शहर था, टूटना, बसना उसकी फितरत थी 

हम तो इश्क़ में पहले से ही पागल थे तू और दीवाना ना बना ये तेरी इनायत है या मोहब्बत मेरी मुझे अपनों से यूँ तो बेगाना, ना बना शाम हु शील, होते- होते, यूँ ही गुजर जाऊंगा तु महफ़िलो में ग़ुलाबी अँधेरा ना रख तेरे चाहने वालो की भीड़ बहुत…

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कोई लोगो से दिल मिलाने का हूनर भी तो देदे 

कोई हमे जीने का बहाना तो दे कोई हमारा हमसे चैन तो छीन ले कोई तो ख़्वाबो में भी आये हमारे कोई नींद हमारी भी तो हमसे छीन ले मैं तो बहका बहका सा रहता हूँ भीड़ में शहर की तेरे कोई लोगो से दिल मिलाने का हूनर…

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क्या बड़े नोटों का चलन बंद करना मोदी सरकार की नितियों का हिस्सा है? 

भारत सरकार ने आज दिनांक ८ नवम्बर २०१६, रात १२ बजे से, आधिकारिक रूप से ५०० रुपए और १००० रुपए का व्यापारिक रूप में चलन को निषेध कर दिया है । अब ये नोट किसी प्रयोग के नहीं रह जाएंगे, केवल कुछ विशेष अवस्थाओ में इनका…

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जाने कैसे हुआ YOU TUBERS को RELIANCE JIO Sim से लाखो (Subs) का फ़ायदा 

सितम्बर महीने से ही जब लोगो के पास जिओ सिम आ गये थे तो सबसे बड़ी उत्सुकता You Tube पर फ्री विडियो देखने की रही। ये एक ऐसा सोर्स था जिसका बड़ा ही लिमिटेड  यूज़ हो रहा था, मात्र वो भी शहरो में । You Tubers…

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मेरी मास्को यात्रा- २०१४ 

बड़े ही असमंजस और दुःख के साथ कम्प्यूटर विशेषज्ञ की दुकान से वापिस लौटा, निराशा की किरण ने दस्तक तो दी लेकिन स्वयं की आशावादी प्रकर्ति ने उसको अंदर आने नहीं दिया। मेरी पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन को वो विशेषज्ञ भी खोज नहीं पाया, आंकड़े संकलन…

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मेरे बचपन की होली 

मेरे बचपन की होली याद करते ही, ह्रदय बड़ा उत्साह और उमंग से भर जाता है, मन में अनेको विचार, रक्त में नयी ऊर्जा का जैसे संचार होने लगता है। दोस्तों की वो टोली जिसमे उम्र से बड़े और छोटे सबकी एक ही इच्छा बस…

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मेरी पसंद बेसन का हलुआ और महाशिवरात्रि पर्व 

सर्व प्रथम महाशिवरात्रि  पर्व की आपको बहुत- बहुत शुभकामनायेँ ! गृह स्वामिनी के अनुरोध को नकारते हुए विद्रोह का स्वर अति उन्मुख करते हुए हमने कह दिया की आज व्रत रख पाना संभव नहीं है। आँखों में दया, प्रेम और संकुचाहट के भाव लेकर बोली,…

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भीख मांगने पर प्रयोग 

भारत जैसे देश की रचनात्मक प्रकृति ही है जहाँ देश में बच्चे शिक्षा और साधनो के अभाव में भीख मांगने पर  प्रयोग करते है। सामाजिक जीवन में कई बार इन दर्शयों को देखकर दुःख की अनुभूति होती है । देश का दुर्भाग्य कहना होगा जहाँ भविष्य…

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समर्पण 

समर्पण करना चाहता हूँ ,  तुमको  आँसू , वेदनाएँ  असहाए पीड़ा , भूख  ईर्ष्या-द्वेष  और रिश्तो में छिपायी हुई  नफरत, ठहाको के पीछे, खड़े , शोषण के विचार ।  मानसिक अपंगता, वैचारिक कुरूपता , के सिवाय मात्र, मिल गये थे जो , कुछ क्षण । …

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संसार के सबसे बड़े जनतंत्र की संसद 

पिछले सालो से देश में संसद के अंदर, संसद के प्रतिनिधियों का व्यवहार, उनकी कार्य प्रणाली, स्पीकर महोदय के प्रति उनका रवैया और किसी भी मुददे पर उनका आपसी टकराव, सोचने पर विवश करने लगा है है कि वास्तव में संसार के सबसे बड़े जनतंत्र…

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प्लेटफॉर्म 

यूँ तो अक्सर सफर में छोटे बड़े प्लेटफार्म निकलते जाते हैं लेकिन रुक जाती हैं आँखे ये नज़र क्षण भर के लिए टाट -पट्टियों से लिपटे समाज पर शरीर के उभारो को छिपाती हुई संस्कृति पर सुखी हुई छाती से नंगे आडम्बर को दूध पिलाती…

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तेरा शहर ! 

कुछ तो चाँद पहले से ही अँधेरे में निकला था  कुछ चाँदनी ने घूँगट ओढ़ लिया  कुछ तो पैर फैलाने के लिए पहले ही जगह कम थी, तेरे शहर में  कुछ मयख़ाने गमो से ज्यादा बढ़ने लगे  कुछ तो तेरे शहर में पहले ही भीड़ गूंगो की…

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विरहा 

तुम बिन सावन सूना  सूना मेरे मन का कोना है  कोयल बोले , मनवा डोले  विरहा आग जलाती है  तुम रूठे, सपने टूटे  सावन भी कांटे चुभाता है  हरे -हरे सब घास पैड  हरियाली सब ओर छाई है  ये कैसा अबका सावन  क्यों मेरे घर आँगन…

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क्या नहीं इस जीवन में 

हर्ष है , शोक है तृष्णा है तो तृप्ति भी है क्या कुछ नहीं है इस जीवन में संघर्ष है तो सफलताएं भी है घृणा है तो प्रेम भी है भीड़ है तो तन्हाईयाँ भी है तस्वीरें है तो यादे भी है बिछुड़ना है तो…

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दहशत 

  अँधेरे रास्तो से    गुजरी जो एक परछायी  दरवाजे बंद हो गए  सहमा-सहमा सा आसमान सहमी -सहमी सी रात हो गयी        खौफ था आँखों में   घाव भी हरा था  ये फिर किसने  पत्थर फ़ेंक दिया   ये फिर किस घर के …

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बचपन 

  बचपन , खुशियों से भरा    कुछ रोना , कुछ हँसना  कुछ खाना , कुछ खेलना  दिन में सोना, रात में सोना  माँ की ममता  उसका फटकारना  लोरी सुनाना  जिद करना  तोड़ना -फोड़ना  चुटकी काटना , नाखून मारना  पानी के साथ खेलना  बरसात में…

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स्थायीत्व की खोज 

जीवन के इस पथ पर  बढ़ा जा रहा हूँ  मौसम बदल रहे हैं  कभी वर्षा , कभी तूफान  तो कभी पतझड़ आ रहे हैं  सब वो ही है  वो ही निश्चित क्रम है  कुछ भी तो प्रकृति ने नहीं बदला  लेकिन बदल रहा है  मेरा स्वरूप …

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सौन्दर्यता 

सौंदर्य,  सौंदर्य से ही विलासिता  जीवन का एकाकीपन  और वैराग्यता  सौन्दर्यता प्रकर्ति की  स्त्री की सौन्दर्यता रेगिस्तान में तपती रेत की  पतझड़ में सूखे पत्तो की  काले बादलो में  दौड़ती बिजली की सौन्दर्यता घुंघरूओं  में खनखनाहट की  रंग-बिरंगे फूलो में  महकती खुशबू  यौवन के उजाले में बिखरी  सौन्दर्यता  सूखे…

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लक्ष्य 

बाधा हो पग- पग पर  ह्रदय में हो आशा  चेतन हो कितना भी आहत  विश्राम नहीं पथ पर  उज्जवल हो अभिलाषा  थक कर चूर हुए कभी  श्रम पथ पर  तो सम्पूर्ण कर्म भाव  प्रभु चरणो में  अर्पित कर देना  परम मानसिक  शुद्ध शारीरिक ऊर्जा  प्रयोग…

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प्रेरणा 

पग – पग हो बाधा   पर लक्ष्य देखना  आगे बढ़ जाना  गीता सार यहीं  प्रत्यक्ष समाना  आहत हो तो   फिर चल जाना  एकरूप देखना  आत्मविश्वास जगाना  ह्रदय में मात्र  एक भाव प्रेम रख  स्व प्रेरित होना  समर्पण करना  लक्ष्य प्राप्ति हेतू  कर्म सार हो  जीवन का मधुर  संगीत…

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यौवन 

यौवन चंचल,  है मदभरा  भँवरे की गुंजन  फूलो की खशबू  दौड़ते -भागते हिरनों  सागर की उठती लहरो  सतरंगी इन्द्रधनुष  क्षितिज को छूने वाला  मनमोहक हरा- भरा  यौवन चंचल है यौवन उत्सुकता है  अनभिज्ञता , पारदर्शिता है ऊर्जावान रचनाकार है  खिलने दो , महकने दो  यौवन जीवन का उपहार…

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बूढ़ा पैड सो गया ! 

खड़ा हूँ,  सूखे पैड सा,  मेरी शाखाओ पर रहने वाले  सारी रात चिं -चिं और  उछल -कूद करने वाले  पक्षियों ने अब घोंसले  दूर कहीं बना लिए है  हवा के झोंके भी अब  गर्दन घूमाने लगे है  लक्क्ड़हारा सुनहरे-सूखे तने पर  दबी आँखों से आस लगाए…

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रिश्तो का दर्द 

अब तो आदत सी हो गयी है  तुम बिन जीने की  रिश्तो के दर्द भी  अंधेरो में पीने की  गिर जाता हूँ हर रोज़  साँवली शाम के आँचल में  तो उठता हूँ सरे शाम  कभी मयखानों से   हाल अच्छा है रहने दे अभी  होंगे रंग बाकी कई …

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पत्थर बनूँ कैसे ? 

मिट्टी हूँ मै अभी  पत्थर बनूँ  कैसे ? बिखर ना जाऊं  ज़र्रे-ज़र्रे में कहीं  इस ज़र्रे को  पत्थर बनाऊं कैसे ?  ख़ामोश है वो  क्योंकि भगवान है वो  किसी शिल्पकार के हाथो  तराशा पत्थर है वो 

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स्कूल का पी-ओन सी -ऑफ रोबोट सूरज 

स्कूल का पी-ओन  सी -ऑफ रोबोट सूरज  सवेरे ८ बजे आकर  खोल देता है दफ्तर  व्यवश्थित कर अपनी पैन्ट्री  पानी की बोतले, गिलास आदि  अध्यापक कक्ष में रख देता है सजाकर।   बैठ जाता है कभी  अपनी कुर्सी पर तो कभी  चहल कदमी दफ्तर में  बिरहा…

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दामिनी 

दामिनी वेदना झकजोर गयी हो आत्म मंथन के लिए छोड़ गई हो कब तक देखें मरते हुए, नारी को गाँवो से लेकर शहर की सड़को तक खेत से लेकर ,दफ्तर तक फबतियाँ कसते, देश -द्रोहियों को समानता की बाते करने वाले नेता को आखिर कब…

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अहसास दो पल का 

सुखा सिमटा सा  उसका तन और मन मीलो दूर बैठा, जिससे बचपन, आँखों में, चमक लेकर होंठ बोले ……… अंकल , सेब ले लो …… रुका फिर बोला ……. अमरुद सस्ते हैं ले लो …… जीर्ण-क्षीण हुआ अर्द्धनग्न शरीर उम्र होगी  कोई ९-१० साल टोकरी…

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हर दिन , हर एक सुबह, एक गाँव , एक शहर सड़क पर निकल जाता है 

                                            Ref:http://www.reuters.com/article/2012/06/13/us-g20 हर एक सुबह  एक गाँव , एक शहर  सड़क पर निकल जाता है  गाँव साइकिल पर  काम की तलाश में  और शहर…

School peon
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स्कूल का पिओन रोबोट – सी ऑफ टू सूरज 

 सुबह का समय  सूरज, सवेरे सुबह ८ बजे आकर ही दफ्तर खोल देता है और सबसे पहले ताजा पानी भरने का काम करता है। अपनी पेन्ट्री को साफ़ व्यवस्थित करने के बाद अध्यापको के फैकल्टी रूम में सभी सामान को ढंग से रखता है, पानी…

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यहाँ जख्मों को बाँटने का रिवाज़ चला है कुछ जख़्म हरे हो तो उन्हे बेच दिया करो 

यहाँ जख्मों को बाँटने का रिवाज़ चला है  कुछ जख़्म हरे हो तो उन्हे बेच दो  ये बेमौसमी जख्मे सामान बिक जाएगा  यूँ ही सोच- सोच कर वक़्त ज़ाया ना करो  तुमको मालूम नहीं की ये जख्म पक कर  कब लाल हो जाये  और ये…

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हे ! शिशिर ऋतु तुम इतने निष्ठूर ना बनो 

शिशिर ऋतु तुम इतने निष्ठूर ना बनो  प्रेम समीर तो बहने दो  देखो अब प्रियतम भी ऊब गए हैं  धुप को आँगन में मेरे आने तो दो  चिड़ियाँ भी देखो तो बच्चो संग  कब से घोंसले में ही बैठी है  नन्हें बच्चो के पंख आने…

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कोई परखने वाला नहीं मिला 

तुझसे मिलकर भी  बिछुड़ने की भूल करता रहा  हर शाम तन्हा तन्हा बात करता रहा  मै सीख तो लेता गलतियों से  तुझसे बढ़कर भी मगर मुझे  कोई परखने वाला नहीं मिला  सुशील कुमार 

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क्यों मुनासिब यूँ तेरा शहर लगा 

मेरी हसरते तेरे मुकाम की मोहताज नहीं  मै जीता हूँ की बस साँसो को  आने- जाने का ख्याल होता रहे   मुझे किसी के दिल की आवाज अक्सर  दस्तक तो देती है   क्यों यूँ मै हर शाम से दरवाजा अब खुला रखता हूँ    यूँ ! शराफ़त की बन्दिश लगी ना होती  यूँ…

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गुजरते लम्हे भी पूछने लगे है अब बीती हुई अँगड़ाईयो पे सवाल 

तेरे इश्क़ में बेख़बर  हूँ कि  कुछ दरवाज़े यूँ तलाश रहा हूँ  जो इस गली इस शहर में नहीं मगर  तेरी जुस्तजू में हर चीज़ जहाँ  मै दिल के आईने से देख रहा हूँ  गुजरते लम्हे भी पूछने लगे है  अब बीती हुई अँगड़ाईयो पे सवाल  वो…

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ये सवाल इंसानियत के वज़ूद का है 

ये सवाल किसी कौम या मज़हब का नहीं ए वक़्त  ये सवाल इंसानियत के वज़ूद का है  इस फ़िज़ा में क्यों  औरते -बच्चे महफूज़ नहीं ? हैवानियत भी दर इस कदर  क्यों शर्मशार हुई ? खून के कतरे जमीं पे मासूमों के गिरे  और माओं के जिगर…

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तुझसे मिलूं कोनसा मुखोटा डालकर 

ज़रा सा आहत होते ही  स्वभाव बदल जाता है  वो कहता है की तू मेरा है  और आलम ये की हर चोट पर  वो बहुत दूर चला जाता है मुझे मेरी मै से मतलब  तू करीब हो या रिश्ते में मेरी सोच मेरे कदम  तू…

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श्री कृष्णा जन्माष्ठमी: एक व्रत सांसारिक कर्तव्य एवं धर्म निष्ठां के लिए 

(रिफरेन्स:yogeshvara.deviantart.com से साभार ) भारतीय परम्पराओ में कुछ खास अवसरों पर व्रत रहना एक सामाजिक और राष्ट्रिय प्रचलन रहा है । कुछ ऐसे ही अवसरों पर जब परिवार के सभी लोग व्रत रखे और एक व्यक्ति न रखे तो घर की स्त्रियाँ भी उसको व्रत…

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क्यों ज्ञान का आकलन आज प्रतिशत में बदल गया ? 

अच्छा चरित्र और अच्छा स्वास्थ्य दोनों के साथ कक्षा ५ से कक्षा ६ में प्रवेश हो गया। प्राथमिक विधालय में कक्षा ५ तक प्रति-दिन सुबह प्रार्थना के बाद और छुट्टी होने से पहले कक्षा अध्यापक गणित के पहाड़े सामूहिक रूप से कंठस्थ कराते और क्रमशः…

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गाय का निबन्ध 

याद आता है की कक्षा ५  तक  हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ही अध्यापक गाय के निबन्ध पर बहुत जोर दिया करते थे। गाय का निबन्ध वार्षिक परीक्षा में तो आता ही था उससे पहले अध्यापक गण उसका निरंतर अभ्यास भी कराया करते थे और…

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मेरी जीवन यात्रा के ३०० किमी 

आज पीछे मुड़कर देखता हूँ तो सोचता हूँ कि दिन में सपने देखना बुरा नहीं था । ये अलग बात रही की उन सपनो को पूरा करने के लिए रात को सोया नहीं था। आज के सुशील और बीते कल के सुशील में परिवर्तन का…

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मेरी मास्को यात्रा- २०१४ 

बड़े ही असमंजस और दुःख के साथ कम्प्यूटर विशेषज्ञ की दुकान से वापिस लौटा, निराशा की किरण ने दस्तक तो दी लेकिन स्वयं की आशावादी प्रकर्ति ने उसको अंदर आने नहीं दिया। मेरी पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन को वो विशेषज्ञ भी खोज नहीं पाया, आंकड़े संकलन…

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जीवन में स्कूली शिक्षा का महत्व और प्रभाव 

जीवन में स्कूली शिक्षा का महत्व और प्रभाव दीर्गगामी होता है। एक बच्चा पारिवारिक परिवेश से समाज में विलेयता की ओर स्वंयम और समाज के उतथान की ओर एक कदम बढ़ाता है। पारिवारिक संस्कारो से युक्त होकर देश समाज की संस्कर्ति को सीखता है, प्रयोग…

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भीख मांगने पर प्रयोग 

  भारत जैसे देश की रचनात्मक प्रकृति ही है जहाँ देश में बच्चे शिक्षा और साधनो के अभाव में भीख मांगने पर प्रयोग करते है। सामाजिक जीवन में कई बार इन दर्शयों को देखकर दुःख की अनुभूति होती है । देश का दुर्भाग्य कहना होगा…

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प्रसन्नता के लिए प्रयासरत । 

मैंने स्वयं को सुशील, साधारण और विकास के लिए प्रयत्नशील बने रहने का भरपूर प्रयास किया है। परमशक्ति परमात्मा में विश्वास रखते हुए अपने कार्यों की आहूति विज्ञान के हवन कुण्ड में दी है। मैंने स्वयं से अलग होकर सुशील को  एक अच्छे सामाजिक व्यक्ति,…

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मुझे भारतीय होने का गर्व है 

मेरा भारत महान । मुझे भारतीय होने का गर्व है ।  मुझे भारतीय कहने में जो आत्मविश्वास उत्पन्न होता है उतना ही इंडियन कहने में गुलामी का बोध होता है। सम्पूर्ण विश्व में मेरी भारतीयता से पहचान हो न कि इंडियन से, ऐसा ही मेरा…

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वोट जरूर करे और उस व्यक्ति के लिए करे जो विश्व पटल पर भारत देश का सक्षम नेतृत्व कर सके 

मेरे देश के युवाओ पर आजकल सभी की नजरे टिकी है, युवा शक्ति का रचनात्मक प्रयोग होगा, देश के विकास में तो बहुत अच्छा है। लेकिन आज सत्ता उपभोग के लिए अगर इसका उपयोग किया गया तो आने वाला समय ही बताएगा की इस पीढ़ी…

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खुशबू से सरोकार शहर अब नहीं होता 

  फूल को क्या पता था  उसकी खुशबू से सरोकार शहर  अब नहीं होता  हद तो हो गयी जब मय्यत से उठकर  बागबान भी दुहरा होकर बैठ गया  ऐ खुदा ये दौर कब रुकेगा  अपना ही अपने को गैर कहने से जब रुकेगा  घर तो…

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मुमकिन है मेरे क़त्ल का हिस्सेदार होगा वो 

मुमकिन है मेरे क़त्ल का हिस्सेदार होगा वो पूछ ही लेंगे अबकी बार मेरी कब्र पे जब चिराग जलायेगा वो बड़े अरमानो से दिल में सजाया था उसको क्यों दर्द बनके आँखों से, आँसुओ में टपकता है वो रह -रहकर याद आती है उसकी, दफ़न…

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रिश्तो में पड़ी दरार 

      Ref:pixabay आधार प्रेम का  विशवास का कम ही होगा  वरना कभी ऐसा तो नहीं था कि हमारे -तुम्हारे बीच के  फासले आज यूँ ही बढ़ गए  विरुद्ध हो गया हूँ  कई बार  स्वयं की विचार धाराओ से  सम्भवत कठिन होगा  इस बार  बाँध की…

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तूफ़ान उठता है मेरे सीने में भी 

तूफ़ान उठता है  मेरे सीने में भी  मगर तेरे शहर की  हवाओ से अलग है वो रौशनी होती है मेरे दिल के कोने में भी मगर तेरे शहर के उजाले से अलग है वो टपकती है बूंदे मेरे जिस्म और आँखों से भी मगर तेरे…

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कुछ शराफ़त लिबास में पहले से कम थी 

कुछ तो शराफत तेरे शहर में पहले से ही कम थी। कुछ हम तेरी गली से निकल गये। कुछ शराफ़त तेरे लिबास में पहले से ही कम थी कुछ हमे तेरी आँखों ने बेआबरू कर दिया  कुछ तो बेगाने पहले से थे लोग यहाँ  कुछ…

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जीवन के इस पथ पर बढ़ा जा रहा हूँ 

  जीवन के इस पथ पर  बढ़ा जा रहा हूँ  मौसम बदल रहे हैं  कभी वर्षा, कभी तूफ़ान  तो कभी पतझड़ आ रहे हैं  सब वो ही है  वो ही निश्चित क्रम  कुछ भी तो  प्रकर्ति ने नहीं बदला  लेकिन बदल रहा है  मेरा स्वरुप …

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तुम लौट आओ कि यादो के दिए बुझने लगे 

तुम लौट आओ  कि यादो के दिए  बुझने लगे हैं  उखड़ती हुई सांसो की  आहट से  सजे हुए सपने  टूटने लगे  जाओ ना इतनी दूर हमसे  कि रातो में फिर  चाँद-सितारो से बात करने लगे  तुम लौट आओ  कि यादो के दिए बुझने लगे है. 

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उठा लो पत्थर गिरगिटों की तरहा 

जो चाहो तो उठा लो पत्थर  चाहे तो गले लगा लो  मेरी आदत ही  कुछ ऐसी अब बन गयी है यारो। हकीकत के लिए जो  तुम्हारे सामने मुझको खड़ा करने लगी है संभल जाओ अब तो यारो   तड़पते होंगे अरमां  मेरे दिल के भी…

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दर्द पलकों पे 

झुका के गर्दन जो  हम  निकले गली से  वो समझे  बेसहारा, मायूस हो गए  उनको खबर क्या  हम दर्द पलकों पे उनका  कितना उठा ले गए  तरसते थे पहचान को जो  वो हमसे हमारी पहचान पूछते हैं उनको खबर क्या  ऐसे कई रास्ते अपने  घर…

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एतबार 

जिंदगी ने कल हमसे  सवाल कर ही लिया  कितने मुखोटे हैं तुम्हारे पास ? क्यों अपना  अस्तितत्व खो दिया ? हर इंसान से दिखावा  हर इंसान से अलग व्यवहार फिर क्यों इंसान पे  नहीं तुमको एतबार ?

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इश्क़ में इम्तिहान 

तुम उड़ो खुले जहान में  चाहे जहाँ जी भर के  आके बैठना मगर  मेरे घर कि छत पे  दीदारे अक्ष तेरा करता रहूँगा मेरी जिंदगी की शाम ना  हो जाये जब तक  चाहो तो एक नज़र देख लेना  मेरे इश्क़ की हैसियत क्या है ? बता…

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अंधेरो में चाँद -सितारो की रोशनी 

जीवन पथ है खुशियों से भरा  इस पथ पर तुम चलते जाना  फूलो सी मुस्कान मिलेगी  नदियों सी चंचलता मिलेगी  आ जाये बादल काले कभी  तो शबनम सी बूंदे भी मिलेगी  और वक़्त ठहरा नहीं  सदैव उजालो के लिए  अंधेरो में भी तुझको  चाँद -सितारो…

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पहचान 

कौन ठहरा है  वक़्त के सैलाब के आगे  जब भी कोई  दौर गुजरा  मेरे जीवन को भी  एक खण्डर की  पहचान दे गया

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दर्द 

जिंदगी ने हमसे  कुछ यूँ  फांसला बना लिया  चेहरे पे हँसी दे दी  और आँखों से  उजाला छीन लिया  रोने को चाहे तो  रो दे मगर  आँसुओ ने भी  ना आने का  बहाना बना लिया 

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सींचता हूँ मै, कुछ फूलो के पैड 

सींचता हूँ मै, कुछ फूलो के पैड  कुछ फूलो के पैड, लिए, इस उम्मीद में, कि फूल खिलेंगे  मेरे आँगन में।  होगा ना भेद-भाव किसी में , रंग-रूप अलग हो चाहे जितने, चलेगा पवन का झोका, जब भी, मिल बाटेंगे खुशबू ,सब पैड, मेरे इस…

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उठे होठ जब लहरो कि तरहा 

होठ उठे जब  लहरो कि तरहा  बाल लहराये  घटाओ की तरहा  दिल के कोने से  आवाज आयी तार बज उठा  और मन के  रंगो से  तस्वीर सजायी झुकी पलके जब  शाम हो गयी  साँवली सी रात में  चाँद जेसे निकल गया  जमीं पर रखते  ही…

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गौरी का आँचल 

ढका बादलो ने  चाँद को ऐसे  प्रियतम की राह  देखती गौरी जैसे  माथे पर बिंदिया  ऐसे दमके  चाँद ऊपर तारा जैसे चमके  चांदनी रात में  बादल ऐसे गहराए  गौरी का आँचल  जैसे बार बार लहराये  बाद्ल बरसे  बरसे ऐसे माला के मोती  हों जैसे बिखरे…

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मुझे कोई आदमी कहने की खता ना करे !!!! 

मै धड़कता हूँ  मुझे कोई  दिल कहने की  खता ना करे  मै तड़पता हूँ  चाँदनी रातो में  मुझे कोई चकोर  कहने की  खता ना करे  मै दबा हुआ हूँ  अभी राख में  मुझे कोई  अंगारा कहने की  खता ना करे  मै रहता हूँ  ओढ़ कर…

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लक्ष्य 

बाधा हो ,  हो पग-पग पर, ह्रदय में हो आशा, चेतन हो कितना भी आहत , विश्राम नहीं पथ पर , विश्राम नहीं पथ पर, हो एक उज्जवल अभिलाषा ।  थक कर चूर हुए कभी, श्रम पथ पर , सम्पूर्ण कर्म भाव , प्रभु को…

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दिखावा………क्या है तुम्हारे पास ??? 

पूछा है ये सवाल  बार-बार  मेरे मन ने मुझसे  समुद्र सी गहराई  उठती हुई लहरो की  चंचलता है  तुम्हारे पास ? सोन्दर्य, यौवन से पूर्ण , भव्य  नदियो के मिलन  के बाद भी  अपने तल से  न उठने वाला  समुद्र जैसा  स्वाभिमान , है तुम्हारे…

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दर्द भी अँधेरा भी 

अब तो आदत सी हो गयी है , तुम बिन जीने की।  रिश्तो के दर्द भी, अंधेरो में पीने की।  हर शाम गिरता हूँ , उठता हूँ , कभी तेरी यादों में , कभी मयखानों से, हाल अच्छा है , रहने दे अभी , रंग…

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आदर्श कुर्सी के पीछे 

नेता कुर्सी पर जब सवार हो गया  तो , आदर्श कुर्सी के पीछे  टँग कर रह गया ।  कितना भ्रष्ट , असभ्य, धोखेबाज, ये नेता हो गया ।  घूस-खोरी, चापलूसी, दंगा-फसाद  नेता की , कर्तव्य- निष्ठा हो गया।  वाह रे ! अब तो देश के…

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The Surrender 

समर्पण करना चाहता हूँ ,  तुमको  आँसू , वेदनाएँ  असहाए पीड़ा , भूख  ईर्ष्या-द्वेष  और रिश्तो में छिपायी हुई  नफरत, ठहाको के पीछे, खड़े , शोषण के विचार ।  मानसिक अपंगता, वैचारिक कुरूपता , के सिवाय मात्र, मिल गये थे जो , कुछ क्षण । …

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Environment 

जंगल उजाड़े पशु-पक्षी मारे अब धरोहर -विरासत को मिटाना है । आधुनिकीकरण की राह में पर्यावरण उजड़ा अन्न उपजाऊ भूमि पर इमारतो का निर्माण सड़को के नाम पर लाखो-करोड़ों पैड काटे यहाँ तक कि सभ्य कहने वाले व्यक्ति ने पक्षियों के हैं घर उजाड़े काश…

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मेरा शहर और दंगा 

दर्द हवा में  और , घायल जिस्म जमीं पे पड़े हैं , कोई पत्थर, शायद किसी मंदिर -मस्जिद  को छुआ है ।  आज की शाम, दर्द -ऐ -हवा , रुक-रुक कर , बह रही है ,लगता है ,  राख में दबे शोलो को , पनाह…

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दिल सीने में , दफ़न करके, यूँ कुछ गुजरा हूँ मैं…………”buried my heart in chest,” I would have gone… 

जिंदगी ने यूँ तो मुझको , रोका है  हर मोड़ पर, दीवार बनके , “दिल सीने में , दफ़न करके,” यूँ कुछ गुजरा हूँ मैं, अक्सर तूफ़ान बनके ।  बने जख्मो के निशान  यूँ मिटा लेता हूँ ,  हर लम्हे पर , कुदरत कीं बेमोल…

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University to Cinema Hall_ यूनिवर्सिटी से सिनेमा हॉल तक 

आज फिर उन सभी की इच्छा रखने पर , मै पिक्चर देखने के लिए तैयार हो गया, फिर मन मै वो ही कशमश थी लेकिन जल्दी ही मेने उससे अपना पीछा छुड़ाया और उस सोच को पीछे धक्का देकर, आगे कि और दोस्तों के साथ…

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ehsaas _Feelings 

इस कविता में एक लड़का आठ -नौ  साल  का , जो  थका , भूखा सा एक  पुरानी लम्बी सी शर्ट और फटी हुई पैंट पहेने हुए फल बेच रहा है । वह जमीन पर अपनी फलो की टोकरी के साथ बैठा हुआ है । वह…

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Education 

A good foundation for a learner and reader is what?… it is a piece of original work and culture of the native country to the mind, if one can provide it to them. This piece of work should be distributed at least up to the…

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My Life 

Why I always thinks only about my life, my family, my property, my state…………….? this question i had ask many times to myself . Then I tried to find its answer, does i am self centered today because of nuclear family or more requirement of…