तुम बिन सावन सूना 
सूना मेरे मन का कोना है 
कोयल बोले , मनवा डोले 
विरहा आग जलाती है 
तुम रूठे, सपने टूटे 
सावन भी कांटे चुभाता है 
हरे -हरे सब घास पैड 
हरियाली सब ओर छाई है 
ये कैसा अबका सावन 
क्यों मेरे घर आँगन में 
पतझड़ छाई है