कुछ रिश्ते (Relation) अधूरे थे शायद,वर्ना ,

कभी ऐसा तो नहीं था,

हमारे-तुम्हारे बीच के फाँसले,

यूँ ही बढ़ गए ho। 

विरुद्ध हो गया हूँ ,

कई बार,

स्वयं की विचार धाराओ से,

संभवतय कठिन होगा,  इस बार ,

बाँध की अकस्मात टूटी दीवारो से,

धाराओ का बहाव रोकना । 

रिश्तो में पडी गाँठ,

और गहरी होती खाई ,

पर्तिस्पर्धा की दौड़ में ,मौन बैठी रही , 

काले बादलो के बीच ,

दौड़ती और कड़कड़ाती बिजली भी , 

सम्भवतय रात भर,

खाई भरने की कोशिश करती रही, और

खाई भरने की कोशिश करती रही।