नेता कुर्सी पर जब
सवार हो गया 
तो , आदर्श कुर्सी के पीछे 
टँग कर रह गया । 
कितना भ्रष्ट , असभ्य, धोखेबाज,
ये नेता हो गया । 
घूस-खोरी, चापलूसी, दंगा-फसाद 
नेता की , कर्तव्य- निष्ठा हो गया। 
वाह रे !
अब तो देश के नेतृत्व का 
आधार भी 
इंसानो कि जात हो गया । 
आदर्श रक्खे हैं , 
जिन्होने जनता के सामने , 
देखो तो दफ्तर में उनके 
वो ही कुर्सी के पीछे हो गया । 
नेता कुर्सी पर जब सवार हो गया 
तो आदर्श कुर्सी के पीछे 
टँग कर रह गया ॥