जिंदगी ने कल हमसे 
सवाल कर ही लिया 
कितने मुखोटे हैं तुम्हारे पास ?
क्यों अपना 
अस्तितत्व खो दिया ?
हर इंसान से दिखावा 
हर इंसान से अलग व्यवहार
फिर क्यों इंसान पे 
नहीं तुमको एतबार ?