पूछा है ये सवाल 
बार-बार 
मेरे मन ने मुझसे 
समुद्र सी गहराई 
उठती हुई लहरो की 
चंचलता है 
तुम्हारे पास ?

सोन्दर्य, यौवन से पूर्ण , भव्य 
नदियो के मिलन 
के बाद भी 
अपने तल से 
न उठने वाला 
समुद्र जैसा 
स्वाभिमान , है तुम्हारे पास ?

उजाले, अँधेरे को 
समेटकर, परिवेश के प्राणियो से 
समता का भाव रखने वाली 
प्रकृति का प्रेम 
है तुम्हारे पास ?

और में सदैव 
इन सवालो से बचकर 
आदमीयों के झुण्ड में 
हो जाता हूँ विलय 
जहाँ हर सवाल कि तस्वीर 
लटका दी जाती है 
दीवारो पर , सजावट के लिए 
एक कोने में…… 
स्वयं नहीं , तुमको बताने के लिए 
मात्र दिखावा………….
क्या है तुम्हारे पास ???

                                                          सुशील