जिंदगी ने यूँ तो मुझको ,
रोका है 
हर मोड़ पर, दीवार बनके ,
“दिल सीने में , दफ़न करके,”
यूँ कुछ गुजरा हूँ मैं,
अक्सर तूफ़ान बनके । 
बने जख्मो के निशान 
यूँ मिटा लेता हूँ , 
हर लम्हे पर ,
कुदरत कीं बेमोल हस्ती “माँ”
को गले लगा लेता हूँ । 


सफर लम्बा है, 
“शील ” बाकी ना जाने कितना,
यूँ हौसला दे,
गर इनायत हो तेरी,
ऐ कुदरत मुझे,
तेरे बन्दों की बन्दगी का भी 
बोझ उठालू मैं ।
Life has so casually,
prevented to me,
at every turn, like a wall,
“buried my heart in chest,”
I would have gone,
something like a storm.

Marks of the wounds
‘ll simply erase,
because at every moment,
‘ll Embrace
a unique gift of nature my “mom”

The journey is long,
“SHIL” do not know rest much,
O GOD! Simply give me courage;
to carry the simplicity, purity, and love gracefully,