मै धड़कता हूँ 
मुझे कोई 
दिल कहने की 
खता ना करे 

मै तड़पता हूँ 
चाँदनी रातो में 
मुझे कोई चकोर 
कहने की 
खता ना करे 

मै दबा हुआ हूँ 
अभी राख में 
मुझे कोई 
अंगारा कहने की 
खता ना करे 

मै रहता हूँ 
ओढ़ कर मानव का लिबास
मानवता के जंगल में 
मुझे कोई 
आदमी कहने की 
खता ना करे !!!!