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Author: Dr Sushil Kumar

My Collections

मेरा शहर और दंगा 

दर्द हवा में  और , घायल जिस्म जमीं पे पड़े हैं , कोई पत्थर, शायद किसी मंदिर -मस्जिद  को छुआ है ।  आज की शाम, दर्द -ऐ -हवा , रुक-रुक कर , बह रही है ,लगता है ,  राख में दबे शोलो को , पनाह…

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दिल सीने में , दफ़न करके, यूँ कुछ गुजरा हूँ मैं…………”buried my heart in chest,” I would have gone… 

जिंदगी ने यूँ तो मुझको , रोका है  हर मोड़ पर, दीवार बनके , “दिल सीने में , दफ़न करके,” यूँ कुछ गुजरा हूँ मैं, अक्सर तूफ़ान बनके ।  बने जख्मो के निशान  यूँ मिटा लेता हूँ ,  हर लम्हे पर , कुदरत कीं बेमोल…

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University to Cinema Hall_ यूनिवर्सिटी से सिनेमा हॉल तक 

आज फिर उन सभी की इच्छा रखने पर , मै पिक्चर देखने के लिए तैयार हो गया, फिर मन मै वो ही कशमश थी लेकिन जल्दी ही मेने उससे अपना पीछा छुड़ाया और उस सोच को पीछे धक्का देकर, आगे कि और दोस्तों के साथ…

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ehsaas _Feelings 

इस कविता में एक लड़का आठ -नौ  साल  का , जो  थका , भूखा सा एक  पुरानी लम्बी सी शर्ट और फटी हुई पैंट पहेने हुए फल बेच रहा है । वह जमीन पर अपनी फलो की टोकरी के साथ बैठा हुआ है । वह…

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Education 

A good foundation for a learner and reader is what?… it is a piece of original work and culture of the native country to the mind, if one can provide it to them. This piece of work should be distributed at least up to the…

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My Life 

Why I always thinks only about my life, my family, my property, my state…………….? this question i had ask many times to myself . Then I tried to find its answer, does i am self centered today because of nuclear family or more requirement of…

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